🌿 पेड़ बचाइए, धरती बचाइए — पर्यावरण दिवस पर एक मार्मिक अपील
“तपती धरती की प्यास बुझाने वाले पेड़ अब इंसानी स्वार्थ की आग में जल रहे हैं।”
हर साल 5 जून को हम विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं — स्लोगन लगाते हैं, पोस्टर बनाते हैं, और कहीं-कहीं पौधे भी रोपते हैं। पर क्या यही काफ़ी है?
पेड़, जो कभी हमारे जीवन का हिस्सा थे — अब केवल कहानियों और स्मृतियों में बचे हैं। वो छांव, वो सुकून, वो ताजगी… अब कंक्रीट की दीवारों के पीछे कहीं गुम हो गई है।
राजा-महाराजाओं के ज़माने में सड़कों के दोनों ओर छायादार पेड़ लगाना परंपरा थी। वे जानते थे कि यह धरती केवल पत्थरों से नहीं, हरियाली से सांस लेती है।
आज विकास की दौड़ में हमने पेड़ों को काटकर अपनी ही सांसों को संकुचित कर दिया है। कारख़ाने, मॉल, इमारतें तो बन रही हैं, लेकिन क्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को छांव भी नसीब होगी?
जब मैं कॉलेज जाती हूँ, तो रास्ते का जंगल मानो मुझे माँ की तरह समेट लेता है। वह शांति किसी भी मॉल या A.C. कमरे में नहीं मिल सकती।
🌱 अब भी समय है — आइए कुछ बदलें:
- पर्यावरण दिवस को एक दिन की रस्म न बनाएं, इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
- हर व्यक्ति साल में कम से कम एक पेड़ ज़रूर लगाए — अपने लिए, बच्चों के लिए, भविष्य के लिए।
- छत हो, गली हो या स्कूल का मैदान — हर जगह हरियाली संभव है।
सरकारें, संस्थाएँ और आमजन — सभी की ज़िम्मेदारी है कि वे पेड़ों को बचाएँ, लगाएँ और उनका संरक्षण करें। विकास का मतलब विनाश नहीं होना चाहिए।
इस पर्यावरण दिवस पर एक संकल्प लें:
🌍 तो आइए, इस बार एक पेड़ ज़रूर लगाएं — सिर्फ पर्यावरण दिवस के लिए नहीं, अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें